शनि अपने पिता सूर्य से क्यों नाराज़ रहते थे?

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लेखक: सोनू शर्मा

शनिदेव को क्रूर ग्रहो की श्रेणी में रखा जाता है, लेकिन शनि गरीबी के सहायक है और वह अन्याय करने वाले को दंड देकर संसार में संतुलन बनाते है, तभी शनि को नयायधीश की उपाधि दी गई है। शनिदेव के पिता सूर्य है और इनकी माता का नाम छाया था, वह शिव की बहुत बड़ी भक्त थी। एक बार जब शनि अपनी माता के गर्भ में थे तब ज्येष्ठ माह की भरी दुपहरी में शनि की माता छाया ने शिव की आराधना की, तेज गर्मी से गर्भ में पल रहे शनि का वर्ण काला हो गया।

जब सूर्य अपने पुत्र शनि को देखने आए तब शनि का काला रंग देखकर हैरान हो गए और सूर्य के तेज के कारण पिता को देखते ही शनि की आँखे स्वतः बंद हो गई । इसे पिता ने अपना अपमान समझा और काले वर्ण के कारण सूर्य ने अपनी पत्नी पर लांछन लगाया की शनि उनका पुत्र नहीं है तथा उन्होंने अपनी पत्नी छाया को त्याग दिया । इस बात से शनि अपने पिता से बहुत नाराज़ थे ।

अपने पिता का अभिमान दूर करने के लिए उन्होंने शिव की भक्ति की और उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर शिव ने शनि को अधिक शक्ति ग्रह बना दिया। सभी देवता, विद्याधर तथा असुर शनि की पूजा करते है, यदि शनि अप्रसन्न हो जाए तो दंड देते है तभी इन्हे न्यायधिकारी भी कहते है। ज्योतिष शास्त्र में फलादेश करते समय भी इस दोनों के बीच की इस शत्रुता का ध्यान रखा जाता है।