ॐ के उच्चारण की वैज्ञानिकता व रोग उपचार!

437.gif

लेखक: सोनू शर्मा

ॐ पवित्र व आध्यात्मिक शब्द होने के साथ - साथ इसके मनोवैज्ञानिक तथा चिकित्सीय पहलू भी हैं । ॐ का उच्चारण करने से शरीर में स्थित सात चक्र जाग्रत हो जाते हैं जिससे हमारा शरीर व्यवस्थित रूप से कार्य करता हैं और हम रोगों से बचे रहते हैं ।

ॐ के उच्चारण करने से मन शांत हो जाता हैं, शारीरिक व मानसिक तनाव दूर होता हैं, मन और शरीर हल्का महसूस होता हैं । व्यक्ति की कार्य क्षमता बढ़ जाती हैं तथा चेहरे का तेज बढ़ जाता हैं । जब हम ॐ का उच्चारण करते हैं तो इससे हमारे गले में वाइब्रेशन होती हैं जिससे हमारे गले की ग्रन्थियाँ सक्रिय हो जाती हैं और थाइरोइड की समस्या से बचा जा सकता हैं ।

नियमित ॐ का उच्चारण करने से फेफड़ों को मजबूती मिलती हैं, जिन लोगों को अस्थमा की समस्या हैं उन्हें इसका उच्चारण जरूर करना चाहिए । यदि किसी को नींद न आने की समस्या हो उन्हें रात को सोने से पहले इसका उच्चारण करना चाहिए इससे नींद आसानी से आ जाती हैं । इसके उच्चारण से पेट में वाइब्रेशन होती हैं जिससे पाचन तंत्र ठीक से काम करता हैं और पाचन क्रिया पर अच्छा प्रभाव पड़ता हैं । इसके उच्चारण से घबराहट की समस्या दूर होती हैं और इससे शरीर को ज़्यादा ऑक्सीजन मिलता हैं ।

ॐ का उच्चारण करने से शरीर में कंपन होती हैं जो रीड़ की हड्डी को मजबूत करता हैं तथा तंत्रिका तंत्र को सुचारु रूप से चलाने में सहायक हैं । यह शरीर को विश्राम देने के साथ-साथ हॉर्मोन तंत्र को भी नियंत्रित करता हैं । इसका नियमित उच्चारण करने से शरीर के विषैले तत्व निकल जाते हैं और शरीर में ऊर्जा का संचार होता हैं ।