क्या होता है राशि परिवर्तन योग?

427.jpg

लेखक: सोनू शर्मा

ज्योतिष में कुंडली में अनेक योग पाए जाते है, उनमें से एक है राशि परिवर्तन योग,जब दो ग्रह एक दूसरे की राशि में चले जाते है उसे राशि परिवर्तन योग कहते हैं । यह परिवर्तन ग्रहों, नक्षत्रों तथा राशियों में से किसी का भी हो सकता हैं । यदि ग्रह शुभ हैं तथा केंद्र या त्रिकोण में हैं तो यह राजयोग का निर्माण करता हैं, इसके विपरीत यदि ग्रह नीच का हो या अस्त हो तो परिणाम अच्छे नहीं होते ।

यदि यह परिवर्तन योग शुभ होता हैं तो दोनों ग्रहों का बल महादशा व अन्तर्दशा आने पर बढ़ जाता हैं तथा यह बहुत फलदायक होता हैं, जिस प्रकार कुंडली में उच्च के ग्रह अच्छा परिणाम देते हैं उसी प्रकार यह परिवर्तन योग भी व्यक्ति को उच्चाइयों तक पहुचाने में सहायक होते हैं, इसी प्रकार का परिवर्तन योग नक्षत्रों में भी निर्मित होता हैं ।

यदि यह राशि परिवर्तन योग छटे भाव, अष्टम भाव या बारहवे भाव के स्वामी का हो तो इसे दैत्ये योग कहते हैं, इसे अशुभ माना जाता हैं क्योकि यह योग व्यक्ति को दुःख, परेशानी तथा कठिनाई देता हैं और उस व्यक्ति का कोई भी कार्य बिना संघर्ष के नहीं होता । यदि यह परिवर्तन लग्न व छटे भाव के स्वामी के बीच हो तो व्यक्ति को स्वास्थ सम्बन्धी समस्याओं का सामना करना पड़ता हैं, उस व्यक्ति की मान हानि होती हैं ।

यदि तृतीय भाव का राशि परिवर्तन धन भाव, केंद्र भाव या त्रिकोण के स्वामी के साथ होता हैं तो इसे खाल योग कहा जाता हैं, यह योग बहुत अशुभ नहीं होता पर शुभ भी नहीं होता । यदि यह परिवर्तन तृतीय भाव या धन भाव में हो तो व्यक्ति को धन की प्राप्ति बहुत परिश्रम करने पर होती हैं और तब भी थोड़ा धन प्राप्त होता हैं ।