वास्तुशास्त्र में टोटकों का महत्व!

237.jpg

लेखक: सोनू शर्मा

वास्तुशास्त्र में टोटकों का महत्व !

प्राचीन काल में वास्तु दोष को दूर करने के लिए, अलग अलग सभ्यताओं के लोग अनेक प्रकार के टोटकों का प्रयोग करते थे, यह टोटके आज भी उतने ही प्रचलित हैं । आइए जानते हैं ऐसे ही कुछ टोटके -

१) घर के मुख्य द्वार पर घोड़े की नाल लगाना - वास्तु दोष को दूर करने के लिए बहुत से लोग अपने घर के मुख्य द्वार पर घोड़े की घिसी हुई नाल लगा देते हैं, खास कर के काले घोड़े के पैर से अपने आप घिस कर टूटी हुई नाल का बहुत महत्व हैं । ऐसा माना जाता हैं की लोहे में शनि का वास होता हैं और इससे शनि दोष समाप्त होता हैं और मानसिक तनाव दूर होता हैं और सुख शांति बनी रहती हैं ।

२) मुख्य द्वार पर तुलसी व केले का पेड़ लगाना - घर के मुख्य द्वार पर तुलसी व केले का पेड़ लगाने से जल्दी उन्नति होती हैं और घर में कलेश नहीं होता ।

३) कुमकुम और रंगोली का प्रयोग - हमारे देश के ज़्यादातर राज्यों में महिलाएं वास्तु दोष को दूर करने के लिए अपने घर के मुख्य दरवाजे और देहलीज़ पर रंगोली बनातीं हैं, ऐसी मान्यता थी की सूर्योदय के समय देवता अतिथि के रूप में घर में प्रवेश करते हैं, उन्ही के स्वागत में रंगोली बनाई जाती हैं । ऐसा माना जाता था की कुमकुम के पाँव के साथ घर की बहु घर में प्रवेश करें तो घर दुःख और दरिद्रता से बचा रहेगा ।

४) चांदी के सर्प का टोटका - नए मकान, बिज़नेस या फैक्ट्री को शुरू करने से पहले भूमि पूजन करके उसकी नींव में चांदी का एक सर्प बनाकर डाल देने से मकान की नींव मजबूत रहती हैं, दीवारों में दरार नहीं पड़ती ।