पंचक क्या होता है और इसमें क्या हैं निषेध कार्य?

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लेखक: सोनू शर्मा

पंचक पाँच नक्षत्रों की युति या संयोग को माना जाता है जिसमे शुभ कार्य करना वर्जित माना जाता है लेकिन कुछ काम ऐसे होते है जो उस समय अच्छे फल देते हैं। घनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वामाद्रप्रद, उत्तराभाद्रप्रद तथा रेवती जब ये नक्षत्र एक साथ उदय में हो तो इन पाँच दिनों में दक्षिण दिशा की यात्रा करने का निषेध किया गया हैं, इसी प्रकार घर की छत डलवाना, चारपाई बनवाना, लकड़ी का सामान खरीदना ये काम इन दिनों नहीं करने चाहिए ।

रविवार को यदि पंचक शुरू हो तो उसे ज्योतिष में रोग पंचक की संज्ञा दी गयी हैं, इस दिन शुभ कार्य करने से व्यक्ति शारीरिक एवं मानसिक रोगों से ग्रसित हो सकता हैं इसीलिए इन दिनों कोई भी शुभ कार्य नहीं करने चाहिए । यदि पंचक सोमवार से शुरू होता हैं तो उसे पंचक राज की संज्ञा की जाती हैं । इन दिनों यदि कोई सम्पति विवाद हो या सरकारी कार्य हो तो उन्हें करने से सफलता हासिल होती हैं । मंगलवार को शुरू हुए पंचक में औजार निर्माण कार्य या मशीनों से सम्बंधित कार्य नहीं करना चाहिए लेकिन यदि कोई कचहरी सम्बंधित कोई कार्य हो तो वह कर सकते हैं ।

शनिवार से आरम्भ होने वाले पंचक को मृत्यु पंचक की संज्ञा दी जाती हैं, यह पंचक सबसे अशुभ माना जाता हैं, यदि इस दिन कोई शुभ कार्य आरम्भ किया जाए तो व्यक्ति को मृत्यु के समान कष्ट भोगना पड़ सकता हैं । इन दिनों सबसे अधिक खतरा दुर्घटनाओं का रहता हैं ।

इसी प्रकार जो पंचक शुक्रवार से शुरू होते हैं उन्हें चोर पंचक की संज्ञा दी गयी हैं, इन दिनों यात्रा करना या धन से सम्बंधित कार्य करने से हानि हो सकती हैं, बुधवार या गुरुवार से शुरू होने वाले पंचक को ज़्यादा अशुभ नहीं माना जाता ।

 

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