शरीर में स्थित सात ऊर्जा चक्र!

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लेखक: सोनू शर्मा

हमारे शरीर में सात चक्र स्थित है जिनको जाग्रत करके हम स्वस्थ व निरोग बने रह सकते है, हम ध्यान के माध्यम से इन चक्रो को एक्टिव कर सकते है ।
मूलाधार चक्र - इसे रुट चक्र भी कहा जाता है, यह स्पाइनल कॉर्ड के सबसे निचले हिस्से में यानि जननांगो व गुदा के बीच में स्थित होता है । इसका सम्बन्ध व्यक्ति की सुरक्षा, वीरता व आनंद का भाव का निवास स्थान है, कुम्भ राशि वालों को इसका करना चाहिए ।
मणिपुर चक्र - इसे नाभि चक्र भी कहते है, इसका सम्बन्ध इच्छा शक्ति, गुस्सा और हँसी जैसी भावनाओं से होता है । सिंपल ब्रीथिंग एक्सरसाइज से इसे जाग्रत कर सकते है ।
स्वाधिष्ठान चक्र - इसका सम्बन्ध क्रिएटिविटी, इच्छा, आनंद, आत्मविश्वास से है । यह लोअर बेली में स्थित होता है। अनाहत चक्र - इसे हृदय चक्र भी कहते है, इसका सम्बन्ध इंसान की जटिल भावनाओं, प्रेम, दया, करुणा आदि से है, यह सीने में स्थित होता है ।
विशुद्ध चक्र - यह गले में स्थित होता है, गले से निकलने वाला हॉर्मोन व्यक्ति की ग्रोथ के लिए आवशयक होता है, इससे ध्यान के साथ साथ ॐ के उच्चारण तथा हमिंग के द्वारा जाग्रत कर सकते है ।
आज्ञा चक्र - आज्ञा चक्र सीधे तौर पर पीनियल ग्लैंड से जुड़ा होता है, इसका स्थान दोनों भोहों के बीच में होता है । पीनियल ग्लैंड मेलाटोनिन हॉर्मोन को पैदा करता है जो नींद आने व जागने की प्रक्रिया को रेगुलेट करता है । धनु राशि वालों को आज्ञा चक्र पर ध्यान देना चाहिए ।
सहस्रार चक्र - इसे क्राउन चक्र भी कहते है । आनंद, परम सुख आदि इसको जाग्रत करके प्राप्त कर सकते है,
इसका स्थान सर के सबसे ऊपर के हिस्से में होता है जहाँ पीटीयुटरी ग्लैंड होता है ।