कैसे बनता है कुंडली में दुर्घटना योग?

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लेखक: सोनू शर्मा

आज के भौतिकता वादी युग में हर व्यक्ति के पास समय का अभाव है तथा व्यक्ति अनेक परेशानियो  से ग्रसित है जिसके कारण वह हर कार्य को जल्दी से पूरा कर लेना चाहता है । उसकी इसी लापरवाही की वजह से कभी - कभी दुर्घटनाएँ घटित हो जाती है । यदि हम सचेत रहे तो कुंडली के माध्यम से पहले ही जान सकते है की हमारे साथ कौन सी दुर्घटना हो सकती है ताकि हम सावधानी बरत सके ।

आइये जानते है कुंडली में वह कौन से योग है जिनके माध्यम से हम दुर्घटनाओं के बारे में जान सकते है -

  1. किसी जातक की कुंडली में यदि शुक्र बुरे ग्रहों से घिरा हो तो यह दुर्घटना का सूचक है ।

  2. अष्टम भाव में चंद्र और शनि की युति किसी दुर्घटना का सूचक है ।

  3. किसी जातक की कुंडली में यदि षष्ठम तथा अष्ठम भाव का स्वामी यदि अशुभ ग्रहों के साथ युति करें या दृष्ट हो तो दुर्घंटना की सम्भावना बहुत बढ़ जाती है ।

  4. यदि किसी जातक की कुंडली में लग्न से बारहवे भाव में मंगल हो, सप्तम भाव में मकर ग्रह हो, चन्द्रमा चौथे भाव में तथा राहु पंचम भाव में हो तो व्यक्ति की विमान दुर्घटना से मृत्यु होने की सम्भावना बढ़ जाती है ।

  5. यदि मेष लग्न में राहु हो, छटे भाव में सूर्य, मंगल व बुध स्थित हो तथा अष्टम भाव में शनि हो तो ऐसे व्यक्ति को दिल का दौरा पड़ने के कारण मृत्यु का योग बनता है ।

  6. दुर्घटना में लग्न भाव शरीर का कारक होने के कारण विशेष भूमिका निभाता है, यदि लग्न में शनि या मंगल की युति हो तो यह दुर्घटना का सूचक है, यदि शनि ज़्यादा अशुभ हो और तो पैर में चोट देता है ।