ज्योतिषीय दृष्टि में अंग के फड़कने का क्या अर्थ होता है!

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लेखक: सोनू शर्मा

अंग फड़कना या अंगो में स्फुरण होना एक शारीरिक क्रिया मानी जाती है लेकिन सामुद्रिक शास्त्र में इसे व्यक्ति से जोड़कर देखा जाता है । शरीर के अलग - अलग भागो में स्फुरण से शुभ प्रभाव माने जाते है । जानते है कुछ प्रमुख अंग फड़कने के प्रभावों के बारे में -

१) यदि किसी व्यक्ति के हाथो में स्पंदन महसूस हो तो यह उस व्यक्ति पर किसी मुसीबत आने का संकेत है ।

२) यदि उंगलियों में स्फुरण हो तो यह इस बात का संकेत है की व्यक्ति की अपने किसी पुराने मित्र से मुलाकात होने वाली है ।

३) यदि किसी व्यक्ति को पूरे मस्तक पर फड़कन महसूस हो तो यह व्यक्ति को दूर की यात्रा में होने वाले संकटो की ओर इशारा करता है ।

४) यदि कनपटी के पास फड़कन  हो तो यह धन लाभ की ओर इशारा करता है ।

५) स्त्रियों को यदि बाए हिस्से में फड़कन  हो तो अच्छी खबर मिलती है ओर यदि दाए हिस्से में हो तो वह खबर दुखद होती है ।

६) यदि किसी व्यक्ति की पीठ पर फड़कन  महसूस हो तो यह इस बात का संकेत है की उससे किसी बड़ी मुसीबत का सामना करना पड़ सकता है ।

७) यदि किसी के बायें हाथ की हथेली में फड़कन हो तो वह जिस रोग से ग्रस्त है उससे उस व्यक्ति को शीघ्र ही छुटकारा मिल जायेगा ।

८) यदि व्यक्ति के दाहिने कंधे में फड़कन महसूस हो तो उसे शीघ्र ही कही से धन सम्पदा प्राप्त होती है ।

९) ऊपरी होठ का फड़कना इस ओर का इशारा करता है की उसका जिस किसी से भी झगड़ा चल रहा है वह समाप्त होने वाला है ।

१०) यदि किसी व्यक्ति को दाहिना कान में फड़कन महसूस हो तो उस व्यक्ति की पद उन्नति होती है ।