सावन में शिव जी की पूजा दिलाएगी मनचाहा वर!

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लेखिका : रजनीशा शर्मा

सावन में भगवान शिव की पूजा का महत्व प्राचीन कल से ही है | भारत में अलग अलग इछाओ के लिए अलग अलग देवी देवताओ की पूजा का महत्व है | इसी प्रकार सुखी दाम्पत्य जीवन के लिए भगवान शिव की पूजा की जाती है | इसका भी विशेष कारण यह माना जाता है की भगवान शिव माता पार्वती को जिस प्रकार महत्व देते है हर स्त्री का स्वप्न होता है की उसे उसका पति अपने जीवन में उसी प्रकार महत्व दे वो अपने हर कार्य में शामिल ही न करे बल्कि उसकी खुशियों का भी ख्याल रखे |

भगवान शिव की पूजा मनचाहा वर पाने के लिए सर्वप्रथम माता पार्वती ने की थी और वरदान स्वरूप भगवान शिव को पति के रूप में प्राप्त किया | माता पार्वती ने सावन के महीने में ही भगवान शिव को पाने के लिए तप किया था तभी से सावन में व्रत कर मनचाहा वर पाने का महत्व है | एक अन्य पौराणिक कथा के अनुसार ऋषि मार्तण्डय के अल्पायु पुत्र मार्कण्डेय ने सावन माह में ही तप कर भगवान शिव से दीर्घायु होने का वरदान प्राप्त किया था | ऐसा माना जाता है की सावन माह में ही भगवान शिव हर वर्ष पृथ्वी पर अपनी ससुराल जाते है अतः इस महीने में भगवान शिव पृथ्वी पर रहते है और उनकी कृपा आसानी से प्राप्त की जा सकती है |

 सावन माह में ही भगवान शिव ने हलाहल विष का पान किया था और नीलकंठ कहलाये ,तभी से विष के प्रभाव को कम करने के लिए कावड़ यात्रा में सभी नदियों का जल भगवान् शिव पर चढ़ाने की परम्परा भी है |

सावन में सोमवार व्रत का इतना ही महत्व नहीं है इस व्रत को करने से दाम्पत्य जीवन भी सुखी रहता है और जीवन में कठिनाइयों का सामना नहीं करना पड़ता ,जीवन आसान एवं सरल हो जाता है | भगवान शिव स्वयं सन्यासी है परन्तु ऐसा कुछ भी नहीं जो उनके लिए अदेय हो | सावन में शिव की भक्ति का महत्व कई गुना बढ़ जाता है |

सावन के महीने में सोमवार के दिन का व्रत किया जाता है | सुबह उठकर स्नान कर भगवान् शिव की आराधना करनी चाहिए | भगवान शिव की पूजा में बेल पत्र ,शमीपत्र ,गंगाजल ,धतूरा ,चंदन ,मीठा जल ,दूध और आदि चीजों का प्रयोग किया जाता है , दिन में फलाहार कर सकते है, सम्पूर्ण दिन में एक समय भोजन करने का प्रावधान है | सनातन धर्म में व्यक्ति के विचार ,भाव और कर्मो का ही महत्व है ,और भगवान शिव को तो प्रसन्न करना बहुत ही आसान है भगवान शिव बस एक लोटे जल से ही प्रसन्न हो जाते है |